कोटेश्वर जिला अस्पताल ने रचा इतिहास, जनरल एनेस्थीसिया में पहली सफल सर्जरी

कोटेश्वर जिला अस्पताल ने रचा इतिहास, जनरल एनेस्थीसिया में पहली सफल सर्जरी

  • डॉ. पुष्कर शुक्ला ने अपनी टीम के साथ लिखी रुद्रप्रयाग की धरती से आशा और आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी

कोटेश्वर, रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड)। चिकित्सा क्षेत्र में जनपद रुद्रप्रयाग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। कोटेश्वर स्थित जिला अस्पताल में पहली बार जनरल एनेस्थीसिया (GA) के तहत पित्ताशय (Gallbladder) का ऑपरेशन पूरी तरह सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। यह उपलब्धि न केवल अस्पताल के लिए, बल्कि पूरे जिले के स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक नई शुरुआत का संकेत है।

ऑपरेशन का नेतृत्व और विशेषज्ञ टीम

इस जटिल सर्जरी का सफल नेतृत्व जनरल सर्जन डॉ. पुष्कर शुक्ला ने किया, जो वर्तमान में रुद्रप्रयाग जनपद के PMHS के मीडिया प्रभारी भी हैं। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अशोक ने सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया प्रक्रिया को पूरी दक्षता, सतर्कता और विशेषज्ञता से संभाला।

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नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी सहयोग का अनुकरणीय उदाहरण

सर्जरी के दौरान नर्सिंग ऑफिसर और सर्जरी विभाग की इंचार्ज श्रीमती मधुबाला ने प्रोटोकॉल के अनुशासन और टीम समन्वय के साथ ऑपरेशन थियेटर की कार्यप्रणाली को बिना किसी व्यवधान के सुचारू बनाए रखा। उनके नेतृत्व में नर्सिंग स्टाफ अंजू और वार्ड बॉय चंद्रमोहन ने भी अत्यंत समर्पण के साथ योगदान दिया। ऑक्सीजन आपूर्ति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी चंद्रमोहन सेमवाल ने निभाई, जिन्होंने ऑपरेशन के दौरान सेंट्रल लाइन से OT में निर्बाध ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित कर पूरे सिस्टम को तकनीकी रूप से मज़बूती दी।

सफलता का सूत्र, सामूहिक प्रयास और टीम वर्क

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बोलते हुए डॉ. पुष्कर शुक्ला ने कहा “यह सफलता केवल एक सर्जरी नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक प्रयास, तकनीकी दक्षता और उत्कृष्ट टीम वर्क का प्रतिफल है। यह जिला अस्पताल की क्षमता और संकल्प का परिचायक है, जो आने वाले समय में और भी उन्नत सर्जिकल सेवाओं की राह खोलता है।”

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स्थानीय प्रशंसा और अगली दिशा

इस उपलब्धि पर जिला अस्पताल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पूरी टीम को बधाई दी है। यह पहल भविष्य में रुद्रप्रयाग को बेहतर सर्जिकल और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

यह केवल एक ऑपरेशन नहीं था, बल्कि आशा और आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी की शुरुआत है रुद्रप्रयाग की धरती से।