उत्तराखंड सूचना निदेशालय में कार्यरत रईस अहमद का हर दिन “नो  व्हीकल डे ” साईकिल उनके जीवन का अहम हिस्सा !

उत्तराखंड सूचना निदेशालय में कार्यरत रईस अहमद का हर दिन “नो व्हीकल डे ” साईकिल उनके जीवन का अहम हिस्सा !

23/05/2026 देहरादून

 

इन से मिलिए यह हैं रईस अहमद ,
उत्तराखंड का शायद ही कोई पत्रकार होगा जो इन को नहीं जानता होगा ,
इनका हर दिन “नो व्हिकल डे” रहता है !

आज के दौर में जहां लोग छोटी दूरी तय करने के लिए भी बाइक और कार का इस्तेमाल करते हैं, वहीं सूचना विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी ऐसे भी हैं जिन्होंने सादगी और अनुशासन को अपनी पहचान बना लिया है

पिछले कई दशकों से ये शख्स हर रोज़ साइकिल से ही अपने घर से दफ्तर और दफ्तर से घर का सफर तय करते हैं।
प्रधानमंत्री की “नो व्हीकल डे” जैसी अपील का नेताओं और अधिकारियों ने अनुसरण किया वह भी साइकिल पर नज़र आए हों एक अच्छा सन्देश दिया लेकिन सूचना विभाग के कार्यरत रईस अहमद के लिए साइकिल सिर्फ साइकिल नहीं बल्कि उनकी जिंदगी का हिस्सा है।

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जब उत्तराखंड भी नहीं बना था तब रईस अहमद ने उत्तर प्रदेश सूचना विभाग में साल 1990 में संविदा पर ज्वाइनिंग शुरू की थी और साल 1996 में वह सूचना विभाग में परमानेंट हो गए लेकिन उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड का सफ़र उनका बड़ा दिलचस्प रहा साल 2000 में जब उत्तराखंड बना तो उसके बाद साल 2006 में पुनर्गठन के दौरान रईस अहमद यूपी से उत्तराखंड सूचना विभाग में ट्रांसफर होकर आए और फिर यहीं के होकर रह गए

सुबह की शुरुआत हो या शाम का सफर…देहरादून की सड़कों पर साइकिल चलाते हुए यह चेहरा सूचना विभाग से जुड़े लगभग हर पत्रकार के लिए जाना-पहचाना नाम है रईस अहमद…

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पान मसाला खाना इनका एक बड़ा शौक है और पत्रकारों को मोहब्बत से हंसकर मीठी गोली देने में इनका कोई तोड़ नहीं हैं
जब बड़े बड़े अधिकारी पत्रकारों को हैंडल नहीं कर पाते तो वहाँ रईस अहमद साहब की एंट्री होती है और मामला शांत 😊

रईस अहमद अपनी अनेकों खूबियों के साथ वर्षों से सूचना विभाग के मीडिया सेंटर की जिम्मेदारियों को पूरी मुस्तैदी के साथ संभाल रहे हैं
रईस अहमद की खासियत सिर्फ उनका सादा जीवन नहीं, बल्कि पत्रकारों के साथ उनका व्यवहार भी है।
उत्तराखंड का शायद ही कोई ऐसा पत्रकार होगा जो उनसे वाकिफ ना हो ,किस पत्रकार को किस तरह से संभालना है, किसकी क्या जरूरत है और किस समय क्या व्यवस्था करनी है…
इन सभी बातों में रईस अहमद को महारत हासिल है

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तेज रफ्तार जिंदगी के इस दौर में रईस अहमद उन लोगों के लिए मिसाल हैं जो सादगी, अनुशासन और जिम्मेदारी को अपनी असली पहचान मानते हैं
बस हर दिन अपनी साइकिल के साथ एक जिम्मेदार कर्मचारी की तरह अपने कर्तव्यों का निर्वहन।

साइकिल के पहियों पर चलता यह सफर सिर्फ एक कर्मचारी की कहानी नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान की मिसाल है जिसने सादगी को अपनी ताकत बनाया और अपने व्यवहार से हर किसी के दिल में जगह बनाई रईस अहमद ने इसी साल 2026 में रिटायर हो रहें हैं 🌹

 

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