पंतजलि इमरजेंसी एण्ड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल का अनौपचारिक प्रारंभ, बजट में होगा आधुनिक इलाज पतंजलि ने बड़े हॉस्पिटल की क़री शुरुआत !

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पंतजलि इमरजेंसी एण्ड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल का अनौपचारिक प्रारंभ, बजट में होगा आधुनिक इलाज पतंजलि ने बड़े हॉस्पिटल की क़री शुरुआत !

हरिद्वार, 24 अक्टूबर -2025 / 

योगगुरु बाबा रामदेव की विश्वप्रसिद्ध पतंजलि योग पीठ अब नए वेंचर की शुरुआत करने जा रही हैं यह शुरुवात आधुनिक चिकित्सा पद्धति में मील का पत्थर साबित होगी देश के बड़े बड़े हॉस्पिटल को टक्कर देने और एडवांस आधुनिक सुविधाओं से लैस पतंजलि बड़े हॉस्पिटल के लिए तयार है जिसकी अनौपचारिक शुरुआत हो चुकी है ,

पतंजलि योगपीठ में चिकित्सा विज्ञान का नया इतिहास गढ़ा गया स्वामी रामदेव महाराज तथा आचार्य बालकृष्णजी महाराज की उपस्थिति में यज्ञअग्निहोत्र के अनुष्ठान वेदमंत्रों के साथ पंतजलि इमरजेंसी एण्ड क्रिटिकलकेयर हॉस्पिटल का अनौपचारिक प्रारंभ किया गया। इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि आज चिकित्साविज्ञान के अनुष्ठान का नया अध्याय प्रारंभ हो रहा है। पतंजलि की यह व्यवस्था चिकित्सकीय लोकतांत्रिकव्यवस्था है जो रोगियों के लिए न्याय प्रधान है। उन्होंने घोषणा की कि हरिद्वार में तो इस हॉस्पिटल का मात्रबीजारोपण है, दिल्ली, एन.सी.आर. में एम्स, अपोलो या मेदांता से भी बड़ा वर्जन बहुत जल्द सामने आएगा। विशेषबात यह रहेगी कि यह कॉरपोरेट हॉस्पिटल नहीं काॅपरेट हास्पिटल होगा जिसमें व्यापार नहीं रोगियों की सेवा कीजाएगी। हमारा उद्देश्य एकीकृत चिकित्सा पद्धति (integrative medicine system) के तहत रोगियों कोआरोग्य प्रदान करना है। 

स्वामी जी ने कहा कि पतंजलि में बहुत समय से विचार था कि जहाँ पर नितांत आवश्यक हो, वहाँ माॅडर्न मैडिकलसाइंस का आश्रय लिया जाए। पूरी दुनिया के लिए यह एक नई दृष्टि होगी कि केवल इमरजेंसी के तौर पर ही हमइस विधा का प्रयोग करेंगे। हमारे पास इस नई दृष्टि से समन्वित आप्लावित समर्पित चिकित्सकों की त्रिवेणीका संगम है। एक तरफ हमारी पारंपरिक विद्या में निष्णात आयुर्वेद के वैद्य, दूसरी तरफ मॉडर्न मेडिकल साइंस मेंपारंगत डॉक्टर्स और तीसरी ओर प्राकृतिक चिकित्सा। साथ में अत्याधुनिक मशीनों से जाँच की व्यवस्था हेतुपैरामेडिकल स्टॉफ।

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स्वामी जी ने बताया कि यहाँ कैंसर की सर्जरी को छोड़कर बाकि सारी सर्जरी की व्यवस्था यहाँ पर की गई है।भविष्य में कैंसर की सर्जरी सुलभ कराने की भी हमारी योजना है। अत्यंत जटिल मानी जाने वाली ब्रेन, हार्ट स्पाइन की सर्जरी की व्यवस्था भी इस हॉस्पिटल में उपलब्ध है। साथ ही रोगियों को एम.आर.आई., सी.टी. स्कैन, एक्सरे, अल्ट्रासाउण्ड, पैथोलॉजिकल जाँच आदि की सुविधा भी यहाँ मिल सकेगी। पूरे विश्व के टॉप पैरामीटर्सका यहाँ अनुसरण किया गया है। यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों की सर्जरी तथा क्रिटिकल केयर की व्यवस्था है।उन्होंने कहा कि पतंजलि में बहुत आवश्यक होने पर ही सर्जरी की जाएगी और रोगी हॉस्पिटलों के मनमाने पैकेजके बोझ से भी बच सकेंगे। स्वामी जी ने कहा कि इस सम्पूर्ण व्यवस्था में श्रद्धेय आचार्य जी का बहुत बड़ा पुरुषार्थनिहित है।

कार्यक्रम में आचार्य बालकृष्ण जी ने कहा कि चिकित्सा के लिए माॅडर्न मेडिकल साइंस की मात्र 20 प्रतिशत हीआवश्यकता है। इसमें 80 प्रतिशत परंपरागत चिकित्सा को जोड़ दिया जाए तो चार से पाँच वर्षों में ही पूरी दुनियामें चिकित्सा व्यवस्था को व्यवस्थित करने में हम सफल हो जाएँगे। क्रिटिकल केयर के लिए जहाँ एक ओर माॅडर्नमेडिकल साइंस को हमें स्वीकारना होगा तो वहीं असाध्य समझे जाने वाले रोगों के लिए योगआयुर्वेद को भी हमेंसमाधान के रूप में स्वीकार करना होगा। चरक सुश्रुत संहिता में उल्लिखित है कि चिकित्सक को जो संकल्पदिलाया जाता है, वह किसी पैथी विशेष के लिए नहीं अपितु रोगी को निरोग करने के लिए दिलाया जाता है। आजहमारा चिकित्सकीय ज्ञान पैथियों में बंट चुका है, परंतु लक्ष्य तो पैथियों में बंटना नहीं था। लक्ष्य तो रोगी कोनिरामय करना था। चिकित्सक का उद्घोष था कि तो हमें राज्य चाहिए, स्वर्ग चाहिए, हमें तो बस वह सामर्थ्यचाहिए जो दु:खी, रोगी पीड़ित के रोग पीड़ा का शमन कर सके। आज उस भाव के कितने चिकित्सक हैं, यहविचारनीय प्रश्न है। 

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आचार्य जी ने कहा कि बड़ेबड़े अस्पतालों में चिकित्सकों को टार्गेट दिए जाते हैं, हमने पहले ही दिन चिकित्सकोंसे कह दिया कि यहाँ आपके लिए कोई टार्गेट नहीं है, केवल एक टार्गेट हैरोगियों को आरोग्य प्रदान करना। हमेंएक मिशन के रूप में इस प्रकल्प को सेवा का आदर्श मॉडल बनाना है और पूरे विश्व में इंटीग्रेटेड मेडिकल सिस्टमका एक उदाहरण स्थापित करना है। इसके लिए बहुत सी चुनौतियाँ हैं, जिनपर हमें विजय प्राप्त करना है। कुछलोग कहते हैं कि इस सबके लिए पतंजलि ही क्यों? यह इसिलिए कि हमारे पास हॉस्पिटल के साथसाथविश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र है। हमने योग, आयुर्वेद को एविडेंस बेस्ड मेडिसिन के रूप में किसी ने स्थापित कियाहै। आज हमारे पास रोगियों का विशाल क्लिनिकल डाटा, एविडेंस, बॉयो सेफ्टी लेवल-2 का सर्टिफिकेशन, एनिमल परीक्षण के लिए  इनविवो तथा अन्य प्रयोगशाला जाँच के लिए इनविट्रो अनुंसधान की व्यवस्था है।न्यूक्लियर मैडिसिन तथा पर्सनाइज़्ड मैडिसिन पर भी पतंजलि अनुसंधान कर रहा है। यह सामर्थ्य पतंजलि केअतिरिक्त किसी अन्य हॉस्पिटल के पास नहीं है। आचार्य जी ने कहा कि हमारा वर्षों का स्वप्न साकार होतादिखाई पड़ रहा है। आने वाले दिनों में इंटीग्रेटेड मेडिसिन सिस्टम का प्रतीक श्रद्धेय स्वामी जी और पतंजलि होंगे।इस सम्पूर्ण व्यवस्था में ज्ञानवृद्ध, आयुर्वृद्ध, अनुभववृद्ध और संस्कृति परंपराओं में जीने वाले डॉ. सुनील अहूजाजी का भी विशेष योगदान है।

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कार्यक्रम में डॉ. सुनील अहूजा, डॉ. एन.पी. सिंह, डॉ. साध्वी देवप्रिया, बहन अंशुल शर्मा, बहन पारूल शर्मा, डॉ. संभ्रांत, ब्रिगेडियर टी.सी. मल्होत्रा, डॉ. अनुराग वार्ष्णेय, इमरजेंसी विभाग से डॉ. अनिल दास, डॉ. नितिन कुमारचंचल; आई.सी.यू. विभाग से डॉ. श्वेता जायसवाल, डॉ. अंकित कुमार बोधखे; न्यूरो विभाग से डॉ. गौरव सिंहअभय; ऑर्थोपैडिक विभाग से डॉ. मनोज त्यागी; एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. संजय महेश्वरी; कार्डियोलॉजी विभागसे डॉ. कृष्णा सी.के.; जनरल सर्जरी विभाग से डॉ. कशीश सचदेवा; रेडियोलॉजी विभाग से डॉ. केशव चंद गुप्ता डॉ. शोभित चंद्रा; दंत चिकित्सा विभाग से डॉ. कुलदीप सिंह तथा डॉ. गुरप्रीत ऑबराय तथा पैथोलॉजी विभाग सेडॉ. एस. रेणुका रानी सहित पतंजलि से सम्बद्ध सभी इकाइयों के इकाई प्रमुख, विभाग प्रमुख, प्राचार्यगण तथासंन्यासी भाई साध्वी बहनें उपस्थित रहे।